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July 21, 2012

Exemption of Salaried Employees from Requirement of Filing of Returns for Assessment Year 2012-13

Rajesh Kumawat | 07:09 | | | Best Blogger Tips



आकलन वर्ष 2012-13 के लिए रिटर्नों को भरने की आवश्‍यकता से वेतन भोगी कर्मचारि‍यों को छूट
केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने दिनांक 17 फरवरी, 2012 की अपनी अधिसूचना संख्‍या 9/2012 के द्वारा आकलन वर्ष 2012-13 के लिए रिटर्नों को भरने की आवश्‍यकता से वेतन भोगी कर्मचारि‍यों को छूट दी है। उक्‍त छूट तभी लागू होगी जबकि निम्‍नलिखित सभी शर्तें पूरी कर दी जाती हैं:-

• कर्मचारी ने केवल वेतन से आय तथा बचत बैंक खाते से आय प्राप्‍त की हो तथा बचत बैक खाते से अर्जित किया गया वार्षिक ब्‍याज 10 हजार रुपये से कम हो।

• कर्मचारी की कुल आय 5 लाख रुपये से अधिक ना हो (कुल आय से आशय सकल कुल आय इसमें अध्‍याय VI ए के अधीन कटौतियां घटाएं)
• कर्मचारी ने अपना पीएएन नियोक्‍ता को रिपोर्ट किया हो।

• कर्मचारी ने बचत बैंक खाते पर मिले ब्‍याज से हुई आय को नियोक्‍ता को सूचि‍त किया हो।

• कर्मचारी ने अपने नियोक्‍ता से फार्म 16 प्राप्‍त कर लिया हो।

• टीडीएस के तौर पर कर्मचारी की कुल कर देयताएं नियोक्‍ता द्वारा चुकता कर दी गई हों तथा नियोक्‍ता ने टीडीएस को केन्‍द्रीय सरकार के पास जमा करा दिया हो।

• कर्मचारी का रिफंड दावा ना हो।

• कर्मचारी ने वेतन केवल एक नियोक्‍ता से प्राप्‍त किया हो।

• कर्मचारी ने आयकर विभाग से आयकर विवरण भरने की कोई नोटि‍स न प्राप्‍त की हो।

July 16, 2011

रिटर्न भरने से छूट, मुश्किल है जनाब exemption from filing IT returns

Rajesh Kumawat | 07:29 | | | Best Blogger Tips
सालाना पांच लाख रुपये तक की सालाना आमदनी वालों को रिटर्न भरने से छुटकारे की बात कागज पर बेशक अच्छी लगती है लेकिन गौर से देखें तो शायद ही कोई इन शर्तों को पूरा कर पाए। टैक्स रिटर्न पर छूट के बारे में पूरी जानकारी  : 

सीबीडीटी ने ऐलान किया कि जिन सैलरीड लोगों की सालाना इनकम पांच लाख रुपये तक है, उन्हें रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है। इससे करोड़ों लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई, लेकिन बारीकी से देखें तो ऐसा नहीं लगता कि कोई भी इसका फायदा उठा पाएगा। दरअसल, रिटर्न में इस तरह की शर्तें रखना सीबीडीटी की एक चाल नजर आती है, जिसका असलियत में फायदा शायद ही कोई ले पाए। 

क्या हैं नया नियम 
24 जून को जारी नोटिफिकेशन में बताया गया है कि आप फाइनैंशल ईयर 2010-11 में रिटर्न भरने से बच सकते हैं, अगर इन शर्तों को पूरा करते हैं : 
- कटौती के बाद साल की कुल इनकम पांच लाख रुपये या उससे कम हो। 
- इनकम में सिर्फ सैलरी और बैंक सेविंग से मिलनेवाले ब्याज को ही शामिल किया जाएगा। 
- सैलरी सिर्फ एक एम्प्लॉयर से मिली हो। 
- बैंक में जमा बचत से मिलनेवाला सालाना ब्याज 10 हजार रुपये से कम हो। 
- बैंक में बचत खाते के ब्याज पर टैक्स चुका दिया गया हो और इसका ब्यौरा फॉर्म 16 में हो। 

किसे नहीं मिलेगा फायदा 
यह ऐलान ऐसे वक्त पर हुआ है, जब फॉर्म 16 तैयार हो चुके हैं और करदाताओं को दिए भी जा चुके हैं। सवाल है कि क्या आखिरी पलों में फॉर्म 16 में बदलाव मुमकिन होगा? क्या दूसरी शर्त भी तर्कसंगत है, जिसके मुताबिक इनकम सिर्फ सैलरी और सेविंग अकाउंट पर मिलनेवाले ब्याज से होनी चाहिए? सालाना 3-4 लाख रुपये कमाने वाले ऐसे कितने लोग होंगे, जो एफडी, म्यूचुअल फंड, स्टॉक ट्रेडिंग, गोल्ड और प्रॉपर्टी से कमाई नहीं करते? अगर आप टैक्स बचाने के लिए एफडी या एनएससी में निवेश करते हैं या आपको ईएलएसएस से डिविडेंड मिलता है तो आप रिटर्न से छूट के हकदार नहीं होंगे। अगर आपने एक महीने के लिए भी अपना मकान किराए पर दिया है तो भी रिटर्न फाइल करना होगा। जिसने भी सेक्शन 80 सीसीएफ में छूट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश कर रखा है, उसे भी यह फायदा नहीं मिलेगा। रिटर्न में छूट सिर्फ उनके लिए है, जिन्होंने टैक्स बचाऊ इनवेस्टमेंट नहीं किया है और अपने सारे पैसे बैंक में बचत खाते में डाले हुए हैं। 
चलिए, मान लेते हैं कि कोई ऐसा शख्स है, जिसने कोई इनवेस्टमेंट नहीं किया है, इसलिए सैलरी और बैंक अकाउंट पर मिलनेवाले ब्याज के अलावा उसकी कोई और इनकम नहीं है। फिर भी वह छूट की शर्तों को शायद पूरा न कर पाए। नोटिफिकेशन के मुताबिक, ब्याज पर टैक्स भरा जा चुका हो और इनकम व टैक्स की जानकारी एम्प्लॉयर द्वारा फॉर्म 16 में दी गई हो। बैंक अकाउंट पर ब्याज छमाही आधार पर जमा किया जाता है। 
अक्टूबर से मार्च के बीच का ब्याज 31 मार्च के बाद जमा होता है। इस इनकम पर निकलने वाले टैक्स का सही कैलकुलेशन करने और उसे जमा करने के लिए आपको फाइनैंशल एक्सपर्ट बनना होगा। साथ ही ये डिटेल्स एम्प्लॉयर को वक्त पर देने होंगे, जिससे इन्हें फॉर्म 16 में दिखाया जा सके। 

शर्तें पूरी करना मुश्किल 
आपने फाइनैंशल ईयर में नौकरी बदली है तो भी आपको रिटर्न भरने से छूट नहीं मिल पाएगी। आईटी, सॉफ्टवेयर जैसे सेक्टरों में लोग काफी जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते रहते हैं, इसलिए वहां बहुत कम लोग इस छूट को पाने के हकदार होंगे। भले ही आपका एम्प्लॉयर सारे ब्यौरे फॉर्म 16 में दे दें, लेकिन कुछ और भी छूट होंगी, जिनका ब्यौरा फॉर्म 16 में नहीं होगा। उदाहरण के लिए, किसी चैरिटी को दिए गए दान का ब्यौरा फॉर्म 16 में नहीं होता। यह सिर्फ करदाता पर निर्भर करता है कि वह इस दान पर छूट हासिल करे और इसके लिए उसे टैक्स रिटर्न भरना ही होगा। इसी तरह, अगर आप लॉस को फारवर्ड करना चाहते हैं या आपको रिफंड लेना है तो भी आपको रिटर्न भरना ही होगा। 

अगर आप इन तमाम शर्तों को पूरा कर लेते हैं तो यह काबिलेतारीफ होगा, लेकिन ध्यान रहे कि अगर आप अपना रिटर्न फाइल नहीं करते हैं, तो आप अपने रिटर्न में बदलाव के हक से भी वंचित होंगे। सिर्फ वे करदाता ही रिवाइज्ड रिटर्न भर पाएंगे, जिन्होंने तय तारीख तक अपना रिटर्न भरा है। 


पांच लाख या उससे कम आमदनी के बावजूद भरना होगा रिटर्न अगर 
- सैलरी और सेविंग अकाउंट पर मिलनेवाले ब्याज के अलावा और कहीं से भी आमदनी होती है। 
- टैक्स बचाने के लिए एफडी या एनएससी में निवेश करते हैं या ईएलएसएस से डिविडेंड मिलता है। 
- सेक्शन 80 सीसीएफ में छूट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश कर रखा है। 
- एक महीने के लिए भी अपना मकान किराए पर दिया है। 
- फाइनैंशल ईयर के दौरान नौकरी बदली है। 
- नुकसान को कैरी फॉरवर्ड करना चाहते हैं या रिफंड क्लेम करना है। 

ई-फाइलिंग से जुड़े मिथ और सचाई 
ई-फाइलिंग के जरिए रिटर्न जमा करना बेहद आसान है और आप घर बैठे सिर्फ कुछ क्लिक में रिटर्न फाइल कर सकते हैं, लेकिन इसे लेकर कुछ दिक्कतें आती हैं। क्या आप भी रिटर्न के इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग का सच नहीं जानते? क्या ई-फाइलिंग के बारे में आपके मन में भी कुछ मिथ हैं। अगर हां तो जानिए यहां कुछ मिथ और उससे जुड़ी सचाई : 

1. मिथ : इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन जमा करने के लिए डिजिटल सिग्नेचर चाहिए। 
सचाई : अगर आप अपना रिटर्न पूरा ऑनलाइन फाइल करेंगे तो ही आपको डिजिटल सिग्नेचर चाहिए। बिना डिजिटल सिग्नेचर के भी आप ऑनलाइन रिटर्न फाइल कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन रिटर्न भरने के बाद उसका प्रिंटआउट लेकर उस पर दस्तखत करके इनकम टैक्स के बेंगलुरु ऑफिस पोस्ट से भेजना होता है।

2. मिथ : ई-फाइलिंग में स्क्रूटिनी के ज्यादा चांस होते हैं। 
सचाई : हर साल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट स्क्रूटिनी किए गए लोगों की लिस्ट निकालता है। चाहे आप रिटर्न ऑनलाइन फाइल करें या पेपर के जरिए करें, उस का इस लिस्ट पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 

3. मिथ : ई-फाइलिंग के पैसे कटते हैं, जबकि पेपर से फिजिकली रिटर्न जमा करने के कोई पैसे नहीं लगते। 
सचाई : इनकम टैक्स विभाग की साइट से फ्री में ई-फाइलिंग की जा सकती है। कुछ प्राइवेट पोर्टल भी फ्री फाइलिंग ऑफर करते हैं। ई-फाइलिंग एनवायरनमेंट फ्रेंडली भी है। 

4. मिथ : रिटर्न ऑनलाइन जमा करने के बाद रिवाइज नहीं किया जा सकता है। 
सचाई : ऑनलाइन जमा किया गया रिटर्न भी बाकी की तरह रिवाइज किया जा सकता है। सारे ई-फाइलिंग पोर्टल रिवाइज्ड टैक्स रिटर्न फाइल करने की छूट देते हैं। 

5. मिथ : ई-फाइलिंग सेफ नहीं है और यहां से पर्सनल जानकारियां लीक हो सकती हैं। 
सचाई : ई-फाइलिंग पूरी तरह सेफ है। जो भी जानकारियां ई-फाइलिंग के दौरान दी जाती हैं, उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेज दिया जाता है। यह पूरी तरह गोपनीय होता है। 


June 15, 2011

Exemption on Interest from Post office saving bank account restricted to Rs. 3500

MPIPASP | 09:08 | | Best Blogger Tips

Interest up to Rs 3500 in Post Office Savings Exempted from Income Tax – As per sub-clause (i) of clause (15) of Section 10 of the Income Tax Act, income by way of interest (among certain other incomes) will not form part of taxable income, if notified by the Government and subject to conditions in the notification.Government had notified vide number G.S.R. 607(E), dated the 9th June, 1989, certain securities, bonds etc, for this purpose. As per Sl. No. 9 of the table to this notification, interest from Post Office Savings Bank Account was not to be computed as income. Now, this is amended to restrict the exemption to interest up to Rs. 3500/- for individual account and Rs. 7000 in the case of joint account. Notification is reproduced below:
Section 10(15)(i) Of The Income-Tax Act, 1961 – Exemptions – Income By Way Of Interest, Etc. , On Bonds, Securities – Specification Of Bonds, Securities , Etc., Issued By Central Government –Amendment In Notification No. G.S.R. 607(E), Dated 9-6-1989 

Notification No. 32/2011[F.No.173/13/2011-Ita.I] /S.O.1296(E), Dated 3-6-2011

In exercise of the powers conferred by sub-clause (i) of clause (15) of section 10 of the Income-tax Act, 1961 (43 of 1961) the Central Government hereby makes the following amendment to the notification of the Government of India in the Ministry of Finance, Department of Revenue, Central Board of Direct Taxes, published in the Gazette of India, Extraordinary, Part II, section 3, sub-section (i), vide number G.S.R. 607(E), dated the 9th June, 1989, namely :—

In the said notification, in the Table, for serial number 9 and the entries relating thereto, the following serial number and entries shall be substituted, namely :—

1                     2
3
“9. Post Office Savings Bank Account
To an extent of the interest of Rs. 3,500 in the case of an individual account and Rs. 7,000 in the case of joint account”



2. This notification shall come into force from the date of its publication in the Official Gazette.

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